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फर्जी शिक्षा मॉडल को बेनकाब कर दिया है

फर्जी शिक्षा मॉडल को बेनकाब कर दिया है

दिल्ली नेशनल एचीवमेंट सर्वें ने अरविन्द केजरीवाल के फर्जी शिक्षा मॉडल को बेनकाब कर दिया है। – चौ0 अनिल कुमार

नई दिल्ली, 28 मई, 2022 -(अर्श न्यूज़ ) -दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष चौ0 अनिल कुमार ने कहा कि दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया लंदन में एजुकेशन वर्ल्ड फोरम-22 के कार्यक्रम में दुनिया भर के 122 शिक्षा मंत्रियों और विशेषज्ञों के सामने तथाकथित दिल्ली के शिक्षा मॉडल का बखान कर रहे है जबकि एक राष्ट्रीय औसतन सर्वेक्षण, भाषा, गणित और पर्यावरण अध्ययन पर दिल्ली में प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से भी पीछे रहा और राजधानी में 2017 के बाद शिक्षा के प्रदर्शन में गिरावट दर्ज की गई है और सर्वेक्षण में दिल्ली निचले स्तर पर पांच राज्यों में से एक है। है। उन्होंने कहा कि यह सर्वेक्षण कक्षा 3, 5, 8, और 10वीं कक्षा के 35 लाख छात्रों पर किया गया जिसने अरविन्द केजरीवाल की दिल्ली सरकार के शिक्षा मॉडल के झूठे दावे की पोल खोल कर रख दी है कि सरकारी स्कूल निजी स्कूलों से बेहतर प्रदर्शन कर रहे है। सर्वेक्षण में दिल्ली में सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर में गिरावट की वास्तविकता को दर्शाया गया है।

फर्जी शिक्षा मॉडल को बेनकाब कर दिया है

चौ0 अनिल कुमार ने कहा कि सर्वेक्षण में दर्शाए गए परिणाम से स्पष्ट हो गया है कि पिछले आठ वर्षों में अरविंद केजरीवाल सरकार ने शिक्षा के स्तर को बर्बाद कर दिया है, और बिना प्रींसिपल, वाईस प्रींसिपल और शिक्षकों के दिल्ली सरकार अधिकतर स्कूल चला रही है, जबकि 22,000 से अधिक गेस्ट टीचर नियमित होने की प्रतीक्षा में स्कूल चला रहे हैं। इन गेस्ट टीचरों को केजरीवाल ने चुनावी घोषणा पत्र में नियमित करने का वादा किया था। चौ0 अनिल कुमार ने कहा कि विडंबना यह है कि आप शासित पंजाब ने दिल्ली को पछाड़कर सभी विषयों में सर्वोच्च अंक हासिल किए हैं क्योंकि पिछली कांग्रेस सरकार द्वारा राज्य में शिक्षा पर ध्यान केन्द्रित करके सकारात्मक सोच के साथ काम किया था।

फर्जी शिक्षा मॉडल को बेनकाब कर दिया है

चौ0 अनिल कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल सहित शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया कुछ कक्षा रुमों में रंग रोगन करवाकर दिल्ली में शिक्षा मॉडल की झूठी कहानियां गढ़ कर दिल्ली के लोगों को बेवकूफ बना रहे है और केजरीवाल अन्य राज्यों की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा रहे है और दिल्ली भ्रमण पर आने वाले वरिष्ठ नेताओं को प्रभावित करने चिन्हित स्कूलों को दिखाकर झूठी वाह-वाही लूटने का काम कर रहे है। जबकि सच्चाई यह है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर इस कदर गिर चुका है कि लाखों छात्र स्कूल छोड़ चुके है उन्होने कहा कि कोविड-19 महामारी लॉकडाउन में 70 प्रतिशत सरकारी स्कूली छात्र स्मार्ट फोन/ लैपटॉप और इंटरनेट कनेक्शन जैसी सुविधाओं की कमी के कारण ऑनलाईन शिक्षा से वंचित रहे है जबकि केजरीवाल सरकार ने गरीब छात्रों को सुविधाऐं प्रदान करने का कोई प्रयास नही किया।

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